06. षष्ठम् नवरात्र पूजा || कात्यायनी चरित + षष्ठम् व सप्तम् अध्याय (दुर्गा सप्तशती)
06. षष्ठम् नवरात्र पूजा || कात्यायनी चरित || एवं षष्ठम् व सप्तम् अध्याय (दुर्गा सप्तशती) षष्टम कात्यायनी माँ दुर्गा के छठे स्वरूप का नाम कात्यायनी है। नवरात्रि में छठवें दिन अर्थात षष्ठी को माँ कात्यायनी की पूजा की जाती है। इनका स्वरूप अत्यंत भव्य तथा दिव्य है। इनका शरीर स्वर्ण के समान दैदिप्यमान है। ये भी चार भुजाएँ धारण करने के कारण चतुर्भुजाधारी कहलाती हैं। माँ कात्यायनी की ऊपर वाली दाहिनी भुजा अभय मुद्रा में तथा नीचे वाली भुजा वर मुद्रा में उठी हुई हैं। इन्होने अपनी ऊपर वाली बाई भुजा में तलवार तथा नीचे वाली भुजा में कमल पुष्प धारण कर रखा है। इनका वाहन भी सिंह है। देवी कात्यायनी का मंत्र ‘ ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चै। ऊँ कात्यायनी दैव्यै नमः।’ है। श्रुतियों के अनुसार कत नाम के प्रसिद्ध ऋषि के पुत्र का नाम कात्य था। उन्ही के नाम से प्रसिद्ध कात्य गोत्र में विश्वप्रसिद्ध ऋषि कात्यायन का जन्म हुआ था। उन्होने भगवती जगदम्बा को अपनी पुत्री के रूप में पाने के लिए क...