Posts

Showing posts with the label 001. प्रथम अध्याय (दुर्गा सप्तशती हिन्दी पाठ)

001. प्रथम अध्याय (दुर्गा सप्तशती हिन्दी पाठ)

श्री दुर्गायै नमः। अथ श्रीदुर्गासप्तशती प्रथम अध्याय  (दुर्गा सप्तशती हिन्दी पाठ) मेघा ऋषि का राजा सुरथ और समाधि को भगवती की महिमा बताते हुए मधु कैटभ वध का प्रसंग सुनाना। विनियोग ॐ - प्रथम चरित्रके ब्रह्मा ऋषि, महाकाली देवता, गायत्री छन्द, नन्दा शक्ति, रक्तदन्तिका बीज, अग्नि तत्त्व और ऋग्वेद स्वरूप है। श्रीमहाकाली देवताकी प्रसन्नता के लिये प्रथम चरित्रके जपमें विनियोग किया जाता है । ॥ ध्यानम् ॥ महाकाली जी का ध्यान मन्त्र इस प्रकार है: ध्यान भगवान् विष्णुके सो जानेपर मधु और कैटभको मारनेके लिये कमलजन्मा ब्रह्माजीने जिनका स्तवन किया था, उन महाकाली देवीका मैं ध्यान करता ( करती) हूँ । वे त्रिनेत्री अपने दस हाथों में खड़ग, चक्र, गदा, बाण, धनुष, परिघ, शूल, भुशुण्डि, मस्तक और शङ्ख धारण करती हैं। उनके तीन नेत्र हैं। उनके समस्त अंग दिव्य आभूषणोंसे विभूषित हैं। उनके शरीर की कान्ति नीलमणिके समान है तथा वे दस मुख और दस पैरोंसे युक्त हैं।॥1॥ “ ॐ चंडिकाय नमः ।”  ॐ चण्डीदेवीको नमस्कार है। मार्कण्डेय जी बोले  –  सूर्य के पुत्र सावर्णि, जो आठवें मनु कहे जाते हैं, उनकी उत्पत्ति की कथा व...