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नवदुर्गा और नवग्रह उपासना विधान (विस्तृत)

नवदुर्गा और नवग्रह उपासना विधान (विस्तृत) 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ तांत्रिक ग्रन्थों में यह बताया गया है कि नवदुर्गा नवग्रहों के लिए ही प्रवर्तित हुईं हैं:— नौरत्नचण्डीखेटाश्च जाता निधिनाह्ढवाप्तोह्ढवगुण्ठ देव्या:|| अर्थात्👉 नौ रत्न, नौ ग्रहों की पीड़ा से मुक्ति, नौ निधि की प्राप्ति, नौ दुर्गा के अनुष्ठान से सर्वथा सम्भव है। 👉 सूर्य कृत पीड़ा की शान्ति के लिए शैलपुत्री, 👉 चन्द्रमा कृत पीड़ा की शान्ति के लिए ब्रह्मचारिणी, 👉 मंगल कृत पीड़ा की शान्ति के लिए चन्द्रघण्टा, 👉 बुध कृत पीड़ा की शान्ति के लिए कूष्माण्डा, 👉 गुरु कृत पीड़ा की शान्ति के लिए स्कन्दमाता, 👉 शुक्र कृत पीड़ा की शान्ति के लिए कात्यायनी, 👉 शनि कृत पीड़ा की शान्ति के लिए कालरात्रि, 👉 राहु कृत पीड़ा की शान्ति के लिए महागौरी, तथा 👉 केतु कृत पीड़ा की शान्ति के लिए सिद्धिदात्री... अर्थात्👉 जिस ग्रह की पीड़ा, कष्ट हो उससे संबंधित माँ दुर्गा के स्वरूप की पूजा विधि-विधान से करने पर अवश्य ही शान्ति प्राप्त होती है। नौ ग्रहों का दुष्‍प्रभाव कम करने के लिए करें दुर्गा पूजा, नवरात्रि पर मां के शक्ति स्‍वरूपों की पूजा क...