भगवती श्रीदुर्गा
. "भगवती श्रीदुर्गा" अनन्त कोटि ब्राह्मण्डों की अधीश्वरी भगवती श्रीदुर्गा ही सम्पूर्ण विश्व को सत्ता और स्फूर्ति प्रदान करती हैं। इन्हीं की शक्ति से ब्रह्मादि देवता उत्पन्न होते हैं, जिनसे विश्व की उत्पत्ति होती है। इन्हीं की शक्ति से विष्णु और शिव प्रकट होकर विश्व का पालन और संहार करते हैं। ये ही गोलोक में श्रीराधा, साकेत में श्रीसीता, क्षीरसागर में लक्ष्मी, दक्षकन्या सती तथा दुर्गतिनाशिनी दुर्गा हैं। शिवपुराण के अनुसार भगवती श्रीदुर्गा के आविर्भाव की कथा इस प्रकार है- प्राचीन काल में दुर्गम नामक एक महाबली दैत्य उत्पन्न हुआ। उसने ब्रह्माजी के वरदान से चारों वेदों को लुप्त कर दिया। वेदों के अदृश्य हो जाने से सारी वैदिक क्रिया बन्द हो गयी। उस समय ब्राह्मण और देवता भी दुराचारी हो गये। न कहीं दान होता था, न तप किया जाता था। न यज्ञ होता था, न होम ही किया जाता था। इसका परिणाम यह हुआ कि पृथ्वी पर सौ वर्षों तक वर्षा बन्द हो ग...