Posts

Showing posts from April, 2022

दुर्गा चालीसा

Image
दुर्गा चालीसा का नित्य पाठ करने से मां दुर्गा अपने भक्त पर प्रसन्न होती हैं और वे  हर तरह के संकट दूर करती हैं।    दुर्गा चालीसा   नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥   निरंकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूं लोक फैली उजियारी॥   शशि ललाट मुख महाविशाला। नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥   रूप मातु को अधिक सुहावे। दरश करत जन अति सुख पावे॥   तुम संसार शक्ति लै कीना। पालन हेतु अन्न धन दीना॥   अन्नपूर्णा हुई जग पाला। तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥   प्रलयकाल सब नाशन हारी। तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥   शिव योगी तुम्हरे गुण गावें। ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥   रूप सरस्वती को तुम धारा। दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥   धरयो रूप नरसिंह को अम्बा। परगट भई फाड़कर खम्बा॥   रक्षा करि प्रह्लाद बचायो। हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥   लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं। श्री नारायण अंग समाहीं॥   क्षीरसिन्धु में करत विलासा। दयासिन्धु दीजै मन आसा॥   हिंगलाज में तुम्हीं भवानी। महिमा अमित न जात बखानी॥   मातंगी अरु धूमावति म...

Ashok

Image
*9 अप्रैल 2022 चैत्र मास की शुक्ल पक्ष अष्टमी प्रियदर्शी बौद्ध सम्राट अशोक के जन्मोत्सव पर सभी को हार्दिक बधाई और मंगलकामनाऐ 💐* 9 अप्रैल को सभी देश वासियों से निवेदन है कि बौद्ध सम्राट अशोक के जन्मोत्सव को धूमधाम से मनायें अपने अपने घरों के दरवाजे के दोनों तरफ एक एक मोमबत्तियां जरूर जलाये चक्रवर्ती सम्राट अशोक का जीवन परिचय 👉 पिता का नाम -बिंदुसार 👉 माता का नाम - सुभरदांगी 👉 पत्नी का नाम -देवी करूवाकी, तिषयरक्षिता  👉बेटे का नाम - महेंद्र 👉बेटियाँ - संघमित्रा, तीवल, कुणाल, चारूमती सम्राट अशोक (ईसा पूर्व 298 से ईसा पूर्व 232) विश्वप्रसिद्ध एवं शक्तिशाली भारतीय मौर्य राजवंश के महान सम्राट थे। सम्राट अशोक का पूरा नाम देवानांप्रिय अशोक मौर्य (राजा प्रियदर्शी देवताओं का प्रिय) था। उनका राजकाल ईसा पूर्व 269 सेo, 232 प्राचीन भारत में था। मौर्य राजवंश के चक्रवर्ती सम्राट अशोक ने अखंड भारत पर राज्य किया है तथा उनका मौर्य साम्राज्य उत्तर में हिंदुकुश की श्रेणियों से लेकर दक्षिण में गोदावरी नदी के दक्षिण तथा मैसूर तक तथा पूर्व में बांग्लादेश से पश्चिम में अफ़गानिस्तान, ईरान तक पहुँच गया ...
हम क्यों भूलते जा रहे हैं विक्रम संवत् ? राजशेखर व्यास वि क्रम संवत्' के दो हजार वर्ष का समाप्त होना भारतीय इतिहास की एक महत्त्वपूर्ण घटना थी धूमिल अतीत में विक्रम के स्मारक स्वरूप जिस विक्रम संवत् का प्रवेतन हुआ था, उसके पथ की वर्तमान रेखा यद्यपि अंधकार में डूबी है, परंतु इस डोर के सहारे हम अपने आपको उस श्रृंखला के क्रम में पाते हैं, जिसके अनेक अंश अत्यंत उज्ज्वल एवं गौरवमय रहे हैं। ये दो हजार वर्ष तो भारतीय इतिहास के उत्तरकाल के ही अंश है। विक्रम के उद्भव तक विशुद्ध वैदिक संस्कृति का काल, रामायण और महाभारत का युग, महावीर और गौतम बुद्ध का समय, पराक्रम सूर्य चंद्रगुप्त मौर्य एवं प्रियदर्शी अशोक का काल, अंततः पुष्यमित्र शुंग की साहस गाथा सुदूरभूत की बातें बन चुकी थीं वेद, ब्राह्मण, उपनिषद्, सूत्र ग्रंथ एवं मुख्य स्मृतियों की रचना हो चुकी थी। वैयाकरण पाणिनि और पतंजलि अपनी कृतियों से पंडितों को चकित कर चुके थे और कौटिल्य की ख्याति सफल राजनीतिज्ञता के कारण फैल चुकी थी। उन पिछले दो हजार वर्षों की लंबी यात्रा में भी भारत के शौर्य ने उसकी प्रतिभा के शौर्य ने उसकी विद्वत्ता ने जो मान स्थित...

नौ दिनों के व्रत में दुरुस्त रखें अपना खानपान नहीं होगी कमजोरी

Image
नौ दिनों के व्रत में दुरुस्त रखें अपना खानपान नहीं होगी कमजोरी पौष्टिक आहार लें नवरात्रि व्रत में हल्का और पौष्टिक आहार लें। अपने खाने में प्रोटीन, कार्बोहायड्रेट और फैट की सही मात्रा शामिल करें जिससे आपको व्रत रखने के लिए पर्याप्त ऊर्जा मिलती रहे। कुछ लोग व्रत में कुछ नहीं खाते हैं, यह भी गलत है। अगर आप ठीक तरह से खाना नहीं खाएंगे तो आपके शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाएगा और आपको कमजोरी हो सकती है। ठंडी और तली-भुनी चीज़ों से परहेज करें डॉक्टर्स के मुताबिक नवरात्र नवरात्रि व्रत में हमें ऐसा ज्यादा तेल-मसाले वाला भोजन नहीं खाना चाहिए और हल्का भोजन करना चाहिए। अक्सर लोग व्रत तो रख लेते हैं लेकिन दिनभर कुछ ना कुछ तला- भुना खाते रहते हैं। नवरात्रि व्रत में लोग कुट्टू के आते की पूड़ी, आलू की सब्जी, पकौड़े, टिक्की आदि खाते हैं जिससे पेट ख़राब हो सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक व्रत में ज्यादा पौष्टिक आहार लेना चाहिए जिससे आपको व्रत रखने के लिए एनर्जी मिले। वहीं, बदलते मौसम में आपको ज्यादा तेल-मसाले और ठंडी चीजें खाने से परहेज करना चाहिए। अगर आप बदलते मौसम में ...

माता के नामों की अ, आ, इ, ई .

Image
माता के नामों की अ, आ, इ, ई ...... माता के नामों का ककहरा हिंदी वर्णमाला को आप सभी ने पढ़ा होगा यदि इस तरह से पढ़ेगे तो आपको अ, आ, इ, ई को पढ़ते समय अद्भुतता🌹अद्वितीयता♥️ की अनुभूति* प्राप्त होगी। *अ -🙏🏻अम्बा🙏🏻* *आ- 🙏🏻आद्या🙏🏻* *इ - 🙏🏻इन्द्राणि🙏🏻* *ई - 🙏🏻ईश्वरी🙏🏻* *उ - 🙏🏻उमा🙏🏻* *ऊ-🙏🏻ऊर्ध्वकेशनी🙏🏻* *ॠ-🙏🏻ॠषीकन्या🙏🏻* *ए - 🙏🏻एककन्या🙏🏻* *ऐ - 🙏🏻ऐन्द्री🙏🏻* *ओ-🙏🏻ओंकारेश्वरी🙏🏻* *औ-🙏🏻औषधीश्वरी🙏🏻* *अं -🙏🏻अंकुशधारिणी🙏🏻 *अः-🙏🏻अः🙏🏻* *क - 🙏🏻कात्यायनी🙏🏻* *ख - 🙏🏻खड्गधारिणी🙏🏻 *ग -  🙏🏻गौरी🙏🏻* *घ -  🙏🏻घोररूपा🙏🏻* *ङ - 🙏🏻ङ🙏🏻* *च - 🙏🏻चामुण्डा🙏🏻* *छ - 🙏🏻छत्रेश्वरी🙏🏻* *ज - 🙏🏻जयंती🙏🏻* *झ - 🙏🏻झंकारेश्वरी🙏🏻* *ञ - 🙏🏻ञ🙏🏻* *ट - 🙏🏻टंकारेश्वरी🙏🏻* *ठ - 🙏🏻ठंकारेश्वरी🙏🏻* *ड - 🙏🏻डमरूधारिणी🙏🏻* *ढ - 🙏🏻ढालेश्वरी🙏🏻* *ण - 🙏🏻ण🙏🏻* *त - 🙏🏻तपस्विनी🙏🏻* *थ -🙏🏻थलधारिणी🙏🏻* *द - 🙏🏻दुर्गा🙏🏻* *ध - 🙏🏻धात्री🙏🏻* *न - 🙏🏻नारायणी🙏🏻* *प - 🙏🏻परमेश्वरी🙏🏻* *फ - 🙏🏻फरसाधारिणी🙏🏻 *ब - 🙏🏻ब्रा...

क्या पार्वती ही है माता दुर्गा, जानिए रहस्य

Image
*क्या पार्वती ही है माता दुर्गा, जानिए रहस्य 〰️〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ यदि आप देवी के भक्त है तो आपको यह लेख जरूर अंत तक पढ़ना चाहिए क्योंकि इससे आपके भ्रम का समाधान होगा। तब आप जान सकेंगे कि आप किस देवी की पूजा कर रहे हैं। हिन्दू धर्म में सैंकड़ों देवियां हैं। उनमें से कुछ प्रजापतियों की पुत्रियां हैं, तो कुछ स्यंभू हैं और कुछ अन्य किसी देवता की पत्नियां हैं। यहां हम जानते हैं माता दुर्गा का रहस्य जिन्हें अम्बे, जगदम्बे, शेरावाली, पहाड़ावाली, चामुंडा, तुलजा आदि कहा जाता है। जिन्हें महिष मर्दिनी और शुम्भ-निशुम्भ, चंड-मुंड और रक्तबीज आदि का वध करने वाली कहा जाता है। लेकिन क्या ये सभी देवियां एक ही है या अलग-अलग? क्या ब्रह्मा की पत्नीं सरस्वती उनकी पुत्रीं थीं और क्या लक्ष्मी दो थीं? यह तो आप जानते ही होंगे कि सरस्वती और लक्ष्मी इन दुर्गा माता से भिन्न हैं, लेकिन अब सवाल यह उठता है कि पार्वती भी क्या दुर्गा या अम्बे ही है? क्या काली, तारा, छिन्नमस्ता, षोडशी, भुवनेश्वरी, त्रिपुरभैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला ये सभी एक ही माता हैं? क्या शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघं...

पवित्र चैत्र नवरात्रि के शुभारंभ

नौ माताओं के इस महापर्व के साथ हिंदू नव वर्ष की शुभकामनाएं ' पवित्र चैत्र नवरात्रि के शुभारंभ के साथ हिंदू नव वर्ष की आप सभी को शुभकामनाएं अनंत बधाइयां' वासंतिक नवरात्र नवरात्रि का पहला दिन यानी प्रतिपदा तिथि मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप माता शैलपुत्री को समर्पित माना जाता है। इस दिन जौं (जवार) बोने तथा कलश स्थापना पूजन के साथ ही देवी का पूजन किया जाना शुभ माना जाता है।  यह भी शास्त्रों में लिखा गया है कि प्रथम दिवस में माता की पूजा करते समय आराधक यदि लाल, गुलाबी नारंगी और रानी रंग के कपड़े पहन कर पूजा करने से माता का संपूर्ण आशोवाद प्राप्त होता है।  द्वितीय दिवस यानी नवरात्रि के दूसरे दिन अत्यंत दिव्य देवी ब्रह्मचारिणी की उपासना का विधान है सिद्धि के लिए इस दिन मां की उपासना करते समय सफेद, पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है एवं इस पवित्र दिन में आराधना करने से मनवांछित इच्छाओं की प्राप्ति होती है।  तृतीय दिवस में बाघ पर सवार स्वर्ण के समान रंग एवं छटा वाली मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। इस दिन पीला, लाल, दुधिया या केसरिया रंग कपड़े पहनना शुभ माने जाते हैं एवं इन र...

चैत्र नवरात्री में घट स्थापना-मुहूर्त एवं पूजन विधि

Image
चैत्र नवरात्री में घट स्थापना-मुहूर्त एवं पूजन विधि 〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️ प्रतिवर्ष की भांति इसवर्ष भी हिंदुओ के प्रमुख त्योहारो में से एक चैत्र नवरात्रि चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से नवमी तक मनाया जाएगा। इस वर्ष 2022 में चैत्र नवरात्रों का आरंभ 2 अप्रैल (शनिवार) से होगा और 10 अप्रैल तक व्रत उपासना का पर्व मनाया जाएगा. इस बार किसी भी तिथि का क्षय नहीं होने से नवरात्र का महोत्सव पूरे नौ दिन का होगा तथा 11अप्रैल दशमी के दिन श्रीदुर्गा विसर्जन किया जाएगा।   दुर्गा पूजा का आरंभ घट स्थापना से शुरू हो जाता है अत: यह नवरात्र घट स्थापना प्रतिपदा तिथि को 2 अप्रैल (शनिवार) के दिन की जाएगी। इस बार नवरात्रि महासंयोग लेकर आ रही है। इस बार नवरात्रों में शुभ योग बन रहा है।  इस बार मां का आगमन (अश्व) घोड़े पर हो रहा है। देवी भागवत में नवरात्रि के प्रारंभ व समापन के वार अनुसार माताजी के आगमन प्रस्थान के वाहन इस प्रकार बताए गए हैं। आगमन वाहन 〰️〰️〰️〰️〰️ " शशि सूर्य गजरुढा शनिभौमै तुरंगमे। गुरौशुक्रेच दोलायां बुधे नौकाप्रकीर्तिता॥" देवीभाग्वत पुराण के इस श्लोक में बताया गया है कि मा...