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शुगर में व्रत का खाना

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शुगर में व्रत का खाना शुगर के मरीज हैं तो व्रत में खाएं कुछ ऐसी डिश नवरात्रि में कई लोग व्रत रखते हैं। लेकिन शुगर के मरीजों के लिए उपवास रखना आसान नहीं होता, क्योंकि अधिकतर पकवान मीठे होते हैं। अगर आप ब्लड शुगर को कंट्रोल रखना चाहते हैं और मीठा खाना नहीं छोड़ना चाहते, तो कुछ चीजें हैं, जिन्हें आप अपने घर पर आसानी से बना सकते हैं: क्या मिठाई खाने से शुगर बढ़ता है ?  डायबिटीज होने का मतलब यह नहीं है कि आपको मिठाइयों का सेवन छोड़ देना चाहिए। अपने मीठा खाने की लालसा को संतुष्ट करने के लिए आप कई तरह के खाद्य पदार्थ खा सकते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि इन चीजों से आपको उपवास के दौरान पर्याप्त ऊर्जा मिलेगी और आपका ब्लड शुगर भी कंट्रोल में रहेगा। अंजीर बासुंदी दूध से बनने वाला यह पारंपरिक व्यंजन कुछ ही मिनटों में बनाया जा सकता है। दूध में इलाइची पाउडर डालकर उबालिये, आधा कर दीजिये और भीगे हुए अंजीर डाल दीजिये, मिश्रण को गाढ़ा होने तक पका लीजिये और ढेर सारे मेवों के साथ - परोसिये । डार्क चॉकलेट कम मात्रा में डार्क चॉकलेट खाना आपके लिए बेहतर हो सकता है। यह विशेष रूप से फ्लेवोनोइड्...

माता कालका जी मंदिर

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माता कालका जी भगवती के दिल्ली स्थित इस भवन का इतिहास बहुत पुराना है। कहा जाता है कि इन्द्रप्रस्थ की स्थापना के समय महाराज युधिष्ठिर के अनुरोध पर भगवान श्री कृष्ण ने माता जी के इस सिद्ध पीठ की स्थापना की थी। माता के इस भवन को कुछ लोग इन्द्रप्रस्थ की देवी का स्थान कहते हैं।  महाभारत के युद्ध में विजय के पश्चात् पुनः महाराज युधिष्ठिर ने यहां पर भगवती का पूजन एवं यज्ञ किया था। कालान्तर में यह स्थान 'जयन्ती काली' के सिद्ध पीठ के नाम से विख्यात हुआ।  कुछ विद्वान इसे सूर्यकूट निवासिनी का दरबार मानते हैं क्योंकि इस क्षेत्र में अरावली की इन पहाड़ियों को सूर्यकूट पर्वत का नाम दिया गया है। संस्कृत साहित्य के सुप्रसिद्ध विद्वान अरुणदेव वर्मन ने अपनी पुस्तक सूर्य शतक में यहां का वर्णन किया है और कालिका माई की वन्दना करते हुए लिखा है: ओम् श्री कालिके शुभदे देवि सूर्यकूटनिवासिनी ।  त्वम्     देवि    महामाये,    विश्वरूपे   नमोऽस्तुते।। 12 दरवाजों से युक्त माता का यह भवन अष्टकोण पर तान्त्रिक विधि से बना हुआ है। इसके बाहर की परिक्रम...

जीण माता

जीण माता जीण माता  राजस्थान के  सीकर जिले  में स्थित धार्मिक महत्त्व का एक गाँव है। यह सीकर से 29 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। यहाँ की कुल जनसंख्या 4359है। यहाँ पर श्री जीण माता जी (शक्ति की देवी) का एक प्राचीन मन्दिर स्थित है। जीणमाता का यह पवित्र मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना माना जाता है। राजस्थान की राजधानी जयपुर सेेेे 108 किलोमीटर हैै लोक मान्यताओं के अनुसार जीवण का जन्म चौहान वंश के राजपूत परिवार में हुआ। उनके भाई का नाम हर्ष था जो बहुत खुशी से रहते थे। एक बार जीवण का अपनी भाभी के साथ विवाद हो गया और इसी विवाद के चलते जीवण और हर्ष में नाराजगी हो गयी। इसके बाद जीवण आरावली के 'काजल शिखर' पर पहुँच कर तपस्या करने लगीं।[1] मान्यताओं के अनुसार इसी प्रभाव से वो बाद में देवी रूप में परिवर्तित हुई। जीवण ने यहाँ जयंती माताजी की तपस्या की और जीण माताजी के नाम से पूजी जाने लगी। यह मंदिर चूना पत्थर और संगमरमर से बना हुआ है। यह मंदिर आठवीं सदी में निर्मित हुआ था। जीणमाता राजस्थान, भारत के सीकर जिले में धार्मिक महत्व का एक गांव है। यह दक्षिण में सीकर शहर से 29 किमी की दूरी पर स्थित ह...

शारदीय नवरात्रि में माँ की उपासना के लिये दुर्गा सप्तशती अनुष्ठान विधि

शारदीय नवरात्रि में माँ की उपासना के लिये दुर्गा सप्तशती अनुष्ठान विधि 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼 दुर्गा सप्तशती के अध्याय पाठन से संकल्प अनुसार कामनापूर्ति 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ 1- प्रथम अध्याय- हर प्रकार की चिंता मिटाने के लिए। 2- द्वितीय अध्याय- मुकदमा झगडा आदि में विजय पाने के लिए। 3- तृतीय अध्याय- शत्रु से छुटकारा पाने के लिये। 4- चतुर्थ अध्याय- भक्ति शक्ति तथा दर्शन के लिये। 5- पंचम अध्याय- भक्ति शक्ति तथा दर्शन के लिए। 6- षष्ठम अध्याय- डर, शक, बाधा ह टाने के लिये। 7- सप्तम अध्याय- हर कामना पूर्ण करने के लिये। 8- अष्टम अध्याय- मिलाप व वशीकरण के लिये। 9- नवम अध्याय- गुमशुदा की तलाश, हर प्रकार की कामना एवं पुत्र आदि के लिये। 10- दशम अध्याय- गुमशुदा की तलाश, हर प्रकार की कामना एवं पुत्र आदि के लिये। 11- एकादश अध्याय- व्यापार व सुख-संपत्ति की प्राप्ति के लिये। 12- द्वादश अध्याय- मान-सम्मान तथा लाभ प्राप्ति के लिये। 13- त्रयोदश अध्याय- भक्ति प्राप्ति के लिये। दुर्गा सप्तशती का पाठ करने और सिद्ध करने की विभिन्न विधियाँ 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ सामान्य विधि 👇 नवार्...

इन नौ #औषधियों में वास है #नवदुर्गा का

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इन नौ #औषधियों में वास है #नवदुर्गा का औषधी: सम्प्रवक्ष्यामि महारक्षा विधायिनी । महाकाली तथा चण्डी वाराही चेश्वरी तथा ।। सुदर्शना तथेन्द्रेणी गात्रास्या रक्षयन्ति तम् । बला चातिबला भीरूर्मुसली सहदेव्यपि ।। जाती च मल्लिका यूथी गारुड़ी भृङ्गराजक:। चक्ररूपा महौषध्यो धारिताविजयादिदा: ।।अग्निपुराण १२५/४३-४५ मां दुर्गा नौ रूपों में अपने भक्तों का कल्याण कर उनके सारे संकट हर लेती हैं।  इस बात का जीता जागता प्रमाण है, संसार में उपलब्ध वे औषधियां,जिन्हें मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों के रूप में जाना जाता है। नवदुर्गा के नौ औषधि स्वरूपों को सर्वप्रथम मार्कण्डेय चिकित्सा पद्धति के रूप में दर्शाया गया। चिकित्सा प्रणाली का यह रहस्य वास्तव में ब्रह्माजी ने दिया था जिसे बारे में दुर्गाकवच में संदर्भ मिल जाता है। ये औषधियां समस्त प्राणियों के रोगों को हरने वाली हैं।  शरीर की रक्षा के लिए कवच समान कार्य करती हैं। इनके प्रयोग से मनुष्य अकाल मृत्यु से बचकर सौ वर्ष जी सकता है। आइए जानते हैं दिव्य गुणों वाली नौ औषधियों को जिन्हें नवदुर्गा कहा गया है। १ प्रथम शैलपुत्री यानि हरड़👉 नवदुर्गा का प्रथम...

दुर्गा चालीसा

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दुर्गा चालीसा का नित्य पाठ करने से मां दुर्गा अपने भक्त पर प्रसन्न होती हैं और वे  हर तरह के संकट दूर करती हैं।    दुर्गा चालीसा   नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥   निरंकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूं लोक फैली उजियारी॥   शशि ललाट मुख महाविशाला। नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥   रूप मातु को अधिक सुहावे। दरश करत जन अति सुख पावे॥   तुम संसार शक्ति लै कीना। पालन हेतु अन्न धन दीना॥   अन्नपूर्णा हुई जग पाला। तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥   प्रलयकाल सब नाशन हारी। तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥   शिव योगी तुम्हरे गुण गावें। ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥   रूप सरस्वती को तुम धारा। दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥   धरयो रूप नरसिंह को अम्बा। परगट भई फाड़कर खम्बा॥   रक्षा करि प्रह्लाद बचायो। हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥   लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं। श्री नारायण अंग समाहीं॥   क्षीरसिन्धु में करत विलासा। दयासिन्धु दीजै मन आसा॥   हिंगलाज में तुम्हीं भवानी। महिमा अमित न जात बखानी॥   मातंगी अरु धूमावति म...

Ashok

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*9 अप्रैल 2022 चैत्र मास की शुक्ल पक्ष अष्टमी प्रियदर्शी बौद्ध सम्राट अशोक के जन्मोत्सव पर सभी को हार्दिक बधाई और मंगलकामनाऐ 💐* 9 अप्रैल को सभी देश वासियों से निवेदन है कि बौद्ध सम्राट अशोक के जन्मोत्सव को धूमधाम से मनायें अपने अपने घरों के दरवाजे के दोनों तरफ एक एक मोमबत्तियां जरूर जलाये चक्रवर्ती सम्राट अशोक का जीवन परिचय 👉 पिता का नाम -बिंदुसार 👉 माता का नाम - सुभरदांगी 👉 पत्नी का नाम -देवी करूवाकी, तिषयरक्षिता  👉बेटे का नाम - महेंद्र 👉बेटियाँ - संघमित्रा, तीवल, कुणाल, चारूमती सम्राट अशोक (ईसा पूर्व 298 से ईसा पूर्व 232) विश्वप्रसिद्ध एवं शक्तिशाली भारतीय मौर्य राजवंश के महान सम्राट थे। सम्राट अशोक का पूरा नाम देवानांप्रिय अशोक मौर्य (राजा प्रियदर्शी देवताओं का प्रिय) था। उनका राजकाल ईसा पूर्व 269 सेo, 232 प्राचीन भारत में था। मौर्य राजवंश के चक्रवर्ती सम्राट अशोक ने अखंड भारत पर राज्य किया है तथा उनका मौर्य साम्राज्य उत्तर में हिंदुकुश की श्रेणियों से लेकर दक्षिण में गोदावरी नदी के दक्षिण तथा मैसूर तक तथा पूर्व में बांग्लादेश से पश्चिम में अफ़गानिस्तान, ईरान तक पहुँच गया ...