कुमारी_पूजन_शाक्ततंत्र_का_गूढ_रहस्य
#कुल_कुमारी_पूजन_शाक्ततंत्र_का_गूढ_रहस्य--
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कुल कुमारी पूजन शाक्त–तांत्रिक परम्परा का अत्यन्त गोपनीय और गूढ़ अंग है। यह केवल “बालिका पूजन” नहीं, बल्कि जीवित शक्ति-तत्त्व (Living Shakti Principle) की साक्षात् उपासना है।
(१)#कुमारी_कौन_है? (शास्त्रीय दृष्टि)-- शास्त्रों में कुमारी उस कन्या को कहा गया है— जो रजोदर्शन से पूर्व हो जिसमें विकार, वासना और अहं का प्रवेश न हुआ हो। जो अविभाजित शक्ति (अखंड शुद्ध चेतना) की प्रतीक हो #देवीभागवत और #तंत्रचूड़ामणि में कहा गया है— “या कन्या सा देवी साक्षात् शक्तिरूपा न संशयः।” अर्थात् कन्या स्वयं देवी का प्रत्यक्ष रूप है, प्रतीक नहीं।
(२)#कुल_शब्द_का_रहस्य--
यहाँ कुल का अर्थ केवल वंश नहीं है अपितु कुल का तात्पर्य शक्ति-परम्परा है। तांत्रिक वंश है। मूल प्रकृति अर्थात् मूलाधार से सहस्रार तक की शक्ति-श्रृंखला है। इसलिए कुल कुमारी पूजन ही अपनी कुल-शक्ति (Root Shakti) को जीवित रूप में प्रणाम है। समर्पण है।
(३)#कुल_कुमारी_पूजन_का_आध्यात्मिक_उद्देश्य-- (क) कुमारी साक्षात् शक्ति का अवतरण है। मूर्ति में शक्ति आह्वान से आती है, लेकिन कुमारी में शक्ति पहले से प्रतिष्ठित होती है। इसलिए #शास्त्र कहते हैं— “कुमारीपूजनात् शक्तिः शीघ्रं सन्निधिं गच्छति।” (ख) कुमारी पूजन को गुरु-कृपा का द्वार तंत्र में माना गया है— गुरु की कृपा, देवी की कृपा और कुमारी की तृप्ति। ये तीनों एक ही सूत्र से जुड़ी हैं। यदि कुमारी अप्रसन्न तो साधना निष्फल। यदि कुमारी प्रसन्न तो साधना सिद्ध समझो।
(ग) कर्म-ग्रन्थि का क्षय-- कुल कुमारी पूजन से— वंशानुगत दोष, पितृ-ऋण, स्त्री-अपमानजन्य दोषयुक्त कर्मों का क्षय होता है। #कुलार्णव तंत्र कहता है— “कुमारीतोषणेनैव कुलदोषः प्रणश्यति।”
(४)#नौ_कुमारी_और_शक्तितत्त्व-- शास्त्रों में आयु के अनुसार कुमारी को विभिन्न देवियों से जोड़ा गया है—
आयु नाम शक्ति-तत्त्व
1 वर्ष सन्ध्या आद्य शक्ति
2 वर्ष सरस्वती वाणी
3 वर्ष त्रिधामूर्ति क्रिया-शक्ति
4 वर्ष कालिका संहार
5 वर्ष सुभगा सौभाग्य
6 वर्ष उमा तप
7 वर्ष मालिनी आकर्षण
8 वर्ष कुब्जिका कुण्डलिनी
9 वर्ष कालसन्धि महामाया
विशेषतः 8 वर्ष की कुब्जिका कुमारी कुण्डलिनी शक्ति की जीवित अभिव्यक्ति मानी गई है।
(५)#तंत्र_में_कुमारी_पूजन_क्यों_अनिवार्य? -- क्योंकि तंत्र देह-विरोधी नहीं, तंत्र स्त्री-विरोधी नहीं अपितु तंत्र जीवित चेतना का विज्ञान है। जहाँ स्त्री का सम्मान नहीं, वहाँ तंत्र सिद्ध नहीं होता है। इसी कारण #श्रीविद्या में कहा गया— “स्त्री-निन्दा महापातकः।”
(६)#कुल_कुमारी_पूजन_का_फल (शास्त्रीय) -- साधना में शीघ्र प्रगति होती है। मंत्र-जागरण होता है। गुरु-तत्त्व की कृपा बढ़ती है। वंश में शान्ति बनी रहती है। पुत्र-पुत्री दोष का नाश होता है। शक्ति-मार्ग में स्थिरता बढ़ती है। कुल संबंधी दोष का नाश होता है। स्त्री-दोष शमन होता है। काम-विकार का शोधन होता है। कुण्डलिनी की सुरक्षित जागृति होती है। गुरु-कृपा का प्रवेश और तंत्र-मार्ग में स्थिरता बढ़ती है।
(७)#गूढ़_रहस्य (बहुत महत्त्वपूर्ण)-- कुमारी पूजन वास्तव में बाह्य नहीं, आन्तरिक साधना भी है। कुमारी पूजन तुम्हारी निर्मल चेतना की जागृति है। तुम्हारे अहं-रहित चित्त की चैतन्यता है। तुम्हारी अविकृत शक्ति का अंतर्निहित जागरण है। जब साधक अपने भीतर की “कुमारी-चेतना” का सम्मान करता है, तभी सच्ची सिद्धि घटित होती है।
#निष्कर्षतः-- कुल कुमारी पूजन
कोई लोकाचार नहीं, बल्कि शक्ति-विज्ञान की मूल कुंजी है। जहाँ कुमारी पूजित है, वहीं देवी सजीव हैं। कामाख्या कुल कुमारी पूजन कोई सामाजिक कर्म नहीं, यह सृष्टि-तंत्र का प्रवेश-द्वार है। जहाँ कुमारी पूजित है, वहां कोई कर्म बन्धन नहीं बल्कि वही ब्रह्म का मार्ग बन जाता है।
-- राजेश्वराचार्यः संस्कृतम् वाराणसी/ दिल्ली
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