ॐश्रीमहादेव्यैनमः
ॐश्रीमहादेव्यैनमः🌷
ॐ श्रीं श्रियैनमः।ॐश्रीमहालक्ष्म्यै देव्यै नमो नमः।
ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः।
ॐ अश्वध्वजाय विद्महे धनुर्हस्ताय धीमहि तन्नो शुक्रः प्रचोदयात्।
ॐ अन्नात् परिस्त्रुतोरसं ब्रह्मणा व्यपिकेबत्क्षत्रं पयःसोमं प्रजापतिः,
ऋतेन सत्यमिन्द्रियंविपानंशुक्रमन्धसइन्द्रस्येन्द्रिय मिदं पयोऽमृतं मधु।
दैत्य मन्त्री गुरुस्तेषां प्राणदश्च महामति:।
प्रभु: तारा ग्रहाणांच पीड़ां हरतु मे भृगु:।
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीदॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥
हिमकुंद मृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम्।
सर्वशास्त्र प्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम्।।
प्रात:स्मरामिशरदिन्दु करोज्ज्वलाभां
सद्रत्नवन् मकरकुण्डल हारभूषाम्
दिव्यायुधैर्जित सुनीलसहस्र हस्तां
रक्तोत्पलाभचरणां भवतीं परेशाम्।।*
शरद् कालीन चन्द्रमाके समान उज्ज्वल आभा वाली, उत्तम रत्नोंसेजड़ित मकरकुण्डलों तथा हारोंसे सुशोभित, दिव्यायुधोंसे दीप्त सुन्दर नीले हजारों हाथोंवाली,लालकमलकी आभा युक्त चरणों वाली परम ईशरूपिणी भगवती दुर्गादेवीका मैं प्रातःकाल स्मरण करताहूँ।
नवरात्रिमें मांदुर्गाके इन मंत्रोंका जाप करना भी माना जाताहै:-
*या देवीसर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
ॐ जयंती मंगला काली भद्रकालीकपालिनी,
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।*
ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै,
नवरात्रिमें मांदुर्गाके नौ रूपों की पूजा की जाती है. इनके नाम और मंत्र ये रहे:-
मां कूष्मांडा बीज मंत्र:- *ऐं ह्री देव्यै नम:*
स्तुति मंत्र:-
*या देवीसर्वभूतेषु मांकूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः*।।
श्री नवदुर्गा स्तवः।।
कूष्माण्डा-
*स्वराड् विराड् संसृतिराड् अखण्ड ब्रह्माण्डभाण्डाकलनैकवीरा।
सा पापविध्वंसनसद्म कूष्माण्डाऽव्याद् अपायादयदानशौण्डा।।४।।*
चतुर्थ माताकूष्मांडा:-॥स्तुतिमंत्र॥
*सुरा संपूर्ण कलशं,रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्याभ्यां,कूष्मांडा शुभदास्तुमे।।*
अमृत से परिपूरित कलश को धारण करने वाली और कमलपुष्प से युक्त तेजोमय मां कूष्मांडा हमें सब कार्यों में शुभदायी सिद्ध हो।
*त्रिमूर्तिश्च त्रिवर्षा च कल्याणी चतुरब्दिका।त्रिमूर्तिपूजनादायुस्त्रिवर्गस्य फलं भवेत्।धनधान्यागमश्चैव पुत्रपौत्रादिवृद्धयः।।
त्रिमूर्तिश्च त्रिवर्षा च कल्याणी चतुरब्दिका।
देवीभागवत ३/२६/४१,४६,४७*
व्यासजीकहतेहै-नवरात्रमें कन्यापूजनमें तीन वर्षकी कन्या 'त्रिमूर्ति' कहलातीहै,जिसका पूजन करनेसे धर्म,अर्थ,कामकी पूर्ति होती है, धन-धान्य का आगमन होता है और पुत्र-पुत्र आदि की वृद्धि होती है।चार वर्ष की कन्या 'कल्याणी' कहलाती है, जो विद्या, विजय, राज्य तथा सुख की कामना करता है, उसे सभी कामनाएं प्रदान करने वाली है 'कल्याणी' नामक कन्या का नित्य पूजन करना चाहिए।
*ज्ञानदं मोक्षदं चैव सुखसन्तानवर्धनम्।
शत्रु नाशकरं कामं नवरात्रव्रतं सदा।।
देवी भागवतपुराण ०३/२७/४८*
नवरात्रव्रत सर्वदाज्ञान तथा मोक्षको देनेवाला, सुख तथा सन्तान की वृद्धि करने वाला एवं शत्रुओं का पूर्ण रूप से विनाश करने वाला है।
नवदुर्गा बारे में स्वयं भगवान् श्रीकृष्ण माता की स्तुति में कहते हैं-
*त्वमेव सर्वजननी मूल प्रकृतिरीश्वरी।
त्वमेवाद्या सृष्टिविधौ स्वेच्छया त्रिगुणात्मिका॥कार्यार्थे सगुणा त्वं च वस्तुतो निर्गुणा स्वयम्।परब्रह्मास्वरूपा त्वं सत्या नित्या सनातनी॥तेजःस्वरूपा परमा भक्तानुग्रहविग्रहा।
सर्वस्वरूपा सर्वेशा सर्वाधारा परात्पर॥सर्वबीजस्वरूपा च सर्वपूज्या निराश्रया।
सर्वज्ञा सर्वतोभद्रा सर्वमंगलमंगला॥।*
तुम्हीं विश्वजननी मूल प्रकृति ईश्वरीहो, तुम्हीं सृष्टि की उत्पत्तिके समय आद्याशक्तिके रूप में विराजमान रहतीहो औरस्वेच्छासे त्रिगुणात्मिका बन जातीहो।यद्यपि वस्तुतःतुम स्वयं निर्गुण हो तथापि प्रयोजनवश सगुणहो जातीहो।तुम परब्रह्मस्वरूप, सत्य,नित्य एवं सनातनीहो।परम तेजस्वरूप और भक्तों पर अनुग्रह करने हेतु शरीर धारण करती हो।तुम सर्वस्वरूपा, सर्वेश्वरी,सर्वाधार एवं परात्पर हो।तुम सर्वाबीजस्वरूप,सर्वपूज्या एवं आश्रयरहित हो। तुम सर्वज्ञ, सर्वप्रकार से मंगल करने वाली एवं सर्व मंगलों की भी मंगल हो।
नवरात्रि पर्व पर श्रद्धा और प्रेमपूर्वक महाशक्ति भगवती देवी की उपासना करने से यह निर्गुण स्वरूपा देवी पृथ्वी के सारे जीवों पर दया करके स्वयं ही सगुणभाव को प्राप्त होकर ब्रह्मा, विष्णु और महेश रूप से उत्पत्ति, पालन और संहार कार्य करती हैं।
*🙏जय माता दी🙏ॐजय मां लक्ष्मी*
*आजकादिवसमङ्गलमयहो भगवान श्री कृष्ण, श्रीमंगलामाँ,भगवतीदेवीमाँ,से लक्ष्मीमाँ समस्त कामनाओंकी पूर्ति करें, आपका सदा कल्याण करें
Comments
Post a Comment