जय माता दी

जय माता दी🌹🙏

न तातो न माता न बन्धुर्न दाता
          न पुत्रो न पुत्री न भृत्यो न भर्ता ।
    न जाया न विद्या न वृत्तिर्ममैव
          गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ॥ १॥

भवाब्धावपारे महादुःखभीरु
          प्रपात प्रकामी प्रलोभी प्रमत्तः ।
    कुसंसारपाशप्रबद्धः सदाहं  
          गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ॥ २॥

न जानामि दानं न च ध्यानयोगं
          न जानामि तन्त्रं न च स्तोत्रमन्त्रम् ।
    न जानामि पूजां न च न्यासयोगं
          गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ॥ ३॥

न जानामि पुण्यं न जानामि तीर्थं
          न जानामि मुक्तिं लयं वा कदाचित् ।
    न जानामि भक्तिं व्रतं वापि मातर्-
          गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ॥ ४॥

कुकर्मी कुसङ्गी कुबुद्धिः कुदासः
          कुलाचारहीनः कदाचारलीनः ।
    कुदृष्टिः कुवाक्यप्रबन्धः सदाहं
          गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ॥ ५॥

प्रजेशं रमेशं महेशं सुरेशं
          दिनेशं निशीथेश्वरं वा कदाचित् ।
    न जानामि चान्यत् सदाहं शरण्ये
          गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ॥ ६॥

विवादे विषादे प्रमादे प्रवासे
          जले चानले पर्वते शत्रुमध्ये ।
    अरण्ये शरण्ये सदा मां प्रपाहि
          गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ॥ ७॥

अनाथो दरिद्रो जरारोगयुक्तो
          महाक्षीणदीनः सदा जाड्यवक्त्रः ।
    विपत्तौ प्रविष्टः प्रनष्टः सदाहं
          गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ॥ ८॥

Comments

Popular posts from this blog

महिषासुर का जन्म और कथा

माता कालका जी मंदिर

ॐश्रीमहादेव्यैनमः