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  प्रथम नवरात्र पूजा प्रथम शैलपुत्री  ॐ अम्बेऽऽ मांऽ ऽ जय जगदम्बे ऽऽ मांऽऽ भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट क्षण में हर ले मां  ॐ अम्बेऽऽ मांऽऽ जय जगदम्बेऽऽ मांऽऽ जय जगदम्बेऽऽ मांऽऽ जो ध्यावे फल पावे दुःख बिन से मन का मैया दुख बिन से मन का सुख सम्पति घर आवे सुख सम्पति घर आवे कष्ट मिटे तन का ॐ अम्बेऽऽ मांऽऽ जय जगदम्बेऽऽ मांऽऽ मात पिता तुम मेरी  तो शरण गहूं किसकी मैय शरण गहूं किसकी तुम बिन और ना दूजा तुम बिन और ना दूजा आस करूँ जिसकी ॐ अम्बेऽऽ मांऽऽ तुम पूरण परमात्मिन तुम अंतरियामी मैया तुम अंतरियामी पार ब्रह्म परमेश्वरी  पार ब्रह्म परमेश्वरी  तुम सबके स्वामिन ॐ अम्बेऽऽ मांऽऽ तुम करुणा की सागर तुम पालन करता मैया तुम पालन करता मैं मूरख खलकामनी मैं सेवक तुम स्वामिनी कृपा करो माता  ॐ अम्बेऽऽ मांऽऽ तुम हो एक अगोचर सबकी प्राणेश्वरी  मैया सबके प्राणेश्वरी  किस विध मिलु दयामय किस विध मिलु दयामय तुम को मैं कुमति ॐ अम्बेऽऽ मांऽऽ दीन बन्धु दुःख हर्ता ठाकुर तुम मेरे स्वामी रक्षक तुम मेरे अपने हाथ उठाओ अपनी शरण लगाओ द्वार पड़ा तेरे ॐ जय जगदीश हरे विषय-वि...

नवरात्रि

।। राम ।। श्रीमद्भागवत प्रसंग  - (१६७५) भाई-बहनों! कल से नवरात्रे प्रारम्भ हो रहे हैं, संस्कृत व्याकरण के अनुसार नवरात्रि कहना त्रुटिपूर्ण हैं, नौ रात्रियों का समाहार, समूह होने के कारण से द्वन्द समास होने के कारण यह शब्द पुलिंग रूप 'नवरात्र' में ही शुध्द है, पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा के काल में एक साल की चार संधियाँ हैं, उनमें मार्च व सितंबर माह में पड़ने वाली गोल संधियों में साल के दो मुख्य नवरात्र पड़ते हैं, इस समय रोगाणु आक्रमण की सर्वाधिक संभावना होती है।  नवरात्र शब्द से नव अहोरात्रों (विशेष रात्रियां) का बोध होता है, नवरात्री में शक्ति के नव रूपों की उपासना की जाती है, 'रात्रि' शब्द सिद्धि का प्रतीक है, भारत के प्राचीन ऋषियों-मुनियों ने रात्रि को दिन की अपेक्षा अधिक महत्व दिया है, इसलिये दीपावली, होलिका, शिवरात्रि और नवरात्र आदि उत्सवों को रात में ही मनाने की परंपरा है।  यदि रात्रि का कोई विशेष रहस्य न होता तो ऐसे उत्सवों को रात्रि न कह कर दिन ही कहा जाता, लेकिन नवरात्र के दिन नवदिन नहीं कहे जाते, मनीषियों ने वर्ष में दो बार नवरात्रों का विधान बनाया है, विक...

शरद नवरात्रि 2024

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शरद नवरात्रि     2024            वर्ष 2024 का शरद नवरात्रि का पावन पर्व 3 अक्टूबर से प्रारम्भ हो रहा है ! नौ दिनों तक  चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा आराधना की जाती है ! शास्त्रों में मां दुर्गा को शक्ति की देवी कहा गया है ! इसलिए इसे शक्ति की उपासना का पर्व भी कहा जाता है ! नवरात्र में नौ दिनों तक व्रत किये जाते हैं ! मान्यता है कि नवरात्र के व्रत रखने वालों को मां दुर्गा का आशीर्वाद मिलता है और उनके सभी संकट दूर हो जाते हैं ! माता रानी उनकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं ! इस समय तन्त्र मंत्र साधना पूजा का विशेस को महत्वपूर्ण समय है। .       इस वर्ष 3 अक्टूबर को अश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि पर नवरात्रि की प्रथम स्थापना पड़ रहा है ! अतः प्रातः 05:56 बजे से 07:20 बजे के मध्य कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त है, कलश स्थापना करने के पश्चात व्रत एवं पूजा विधि विधान से प्रारम्भ करना चाहिए ! महाष्टमी 11 अक्टूबर 2024 को, नवमी 12 अक्टूबर को है ! 13 अक्टूबर को मूर्ति विसर्जन एवम विजय दशमी का त...

नवरात्री के प्रकार एवं महत्त्व

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नवरात्री के प्रकार एवं महत्त्व  〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ नवरात्र चल रहा है और हममें से बहुत से लोग इस नवरात्र को शारदीय नवरात्र भी कहते हैं तो, इसी आलोक में क्या आपने कभी सोचा है कि जब हमारे यहाँ ऋतु चार (जाड़ा, गर्मी, बरसात एवं वसंत ऋतु) होती है तो फिर नवरात्र महज दो (शारदीय एवं चैत्रीय) ही क्यों होते हैं  ??? क्योंकि, अगर मौसम चार हैं तो फिर नवरात्र भी चार ही होने चाहिए थे न ?? तो, आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि असल में.... हमारे चंद्रमास के अनुसार नवरात्र वास्तव में ही चार होते है.... 1👉 आषाढ शुक्लपक्ष में "आषाढ़ी" नवरात्र. 2👉 आश्विन शुक्लपक्ष में "शारदीय" नवरात्र. 3👉 माघशुक्ल पक्ष मे "शिशिर" नवरात्र. 4👉 चैत्र शुक्ल पक्ष मे "बासन्तिक" नवरात्र. परंतु, परंपरा से दो नवरात्र (चैत्र एवं आश्विन मास ) ही सर्वमान्य हैं. क्योंकि, चैत्रमास "मधुमास" एवं आश्विन मास "ऊर्जमास" नाम से प्रसिद्ध है... जो शक्ति के पर्याय है. अतः शक्ति आराधना हेतु इस काल खण्ड को "नवरात्र" शब्द से सम्बोधित किया गया है... नवरात्र का मतलब हो गय...
खोलो दया का द्वार  मैया जी अब खोलो दया का द्वार कई जन्मो से भटक रहा हूँ  मत करना इंकार  मैया जी अब खोलो दया का द्वार  खोलो दया का द्वार.... तेरा मेरा साथ पुराना तू दाती मैं भिखारी प्यार की भिक्षा डाल दो अब तो  खड़ा हूँ झोली पसार मैया जी अब खोलो दया का द्वार  खोलो दया का द्वार.... तुम भी अगर प्रभु जी ठुकराओगे  मिलेगा कहा ठिकाना सब द्वारोँ को छोड़ के  दाता आया तेरे द्वार मैया जी अब खोलो दया का द्वार  खोलो दया का द्वार.... करुणासागर कहलाते हो करो कृपा अब मैया जी हाथ पकड़ लो माझी  अब तो नाव पड़ी मझधार मैया जी अब खोलो दया का द्वार  खोलो दया का द्वार.... खोलो दया का द्वार  मैया जी अब खोलो दया का द्वार कई जन्मो से भटक रहा हूँ  मत करना इंकार  मैया जी अब खोलो दया का द्वार , 2 पकड़ लो बाँह अब मईया, नही तो डूब जाएगी पकड़ लो बाँह अब मईया, नही तो डूब जाएगी हमारा कुछ ना बिगड़ेगा, तुम्हारी लाज जाएगी  पकड़ लो बाँह अब मईया.... तुम्हारे ही भरोसे पर जमाना छोड़ बैठा हूँ  तुम्हारे ही भरोसे पर जमाना छोड़ बैठा हूँ  जमाने की तरफ देख...

भगवती श्रीदुर्गा

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नवरात्रि का दूसरा दिन माता का दूसरा स्वरूप:- "माँ ब्रह्मचारिणी"

.                 कल 10.04.2024 दूसरा नवरात्र           नवरात्रि का दूसरा दिन माता का दूसरा स्वरूप:-                               "माँ ब्रह्मचारिणी"            नवरात्र के दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी रूप की पूजा होती है। इस रूप में देवी को समस्त विद्याओं का ज्ञाता माना गया है। देवी ब्रह्मचारिणी भवानी माँ जगदम्बा का दूसरा स्वरुप है। ब्रह्मचारिणी ब्रह्माण्ड की रचना करने वाली। ब्रह्माण्ड को जन्म देने के कारण ही देवी के दूसरे स्वरुप का नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा। देवी के ब्रह्मचारिणी रूप में ब्रह्मा जी की शक्ति समाई हुई है। माना जाता है कि सृष्टी कि उत्पत्ति के समय ब्रह्मा जी ने मनुष्यों को जन्म दिया। समय बीतता रहा , लेकिन सृष्टी का विस्तार नहीं हो सका। ब्रह्मा जी भी अचम्भे में पड़ गए। देवताओं के सभी प्रयास व्यर्थ होने लगे। सारे देवता निराश हो उठें तब ब्रह्मा जी ने भगवान शंकर से पूछा कि ऐसा क्यों हो रहा है। भोले शंकर बोले कि...