माता कालका जी मंदिर
माता कालका जी भगवती के दिल्ली स्थित इस भवन का इतिहास बहुत पुराना है। कहा जाता है कि इन्द्रप्रस्थ की स्थापना के समय महाराज युधिष्ठिर के अनुरोध पर भगवान श्री कृष्ण ने माता जी के इस सिद्ध पीठ की स्थापना की थी। माता के इस भवन को कुछ लोग इन्द्रप्रस्थ की देवी का स्थान कहते हैं। महाभारत के युद्ध में विजय के पश्चात् पुनः महाराज युधिष्ठिर ने यहां पर भगवती का पूजन एवं यज्ञ किया था। कालान्तर में यह स्थान 'जयन्ती काली' के सिद्ध पीठ के नाम से विख्यात हुआ। कुछ विद्वान इसे सूर्यकूट निवासिनी का दरबार मानते हैं क्योंकि इस क्षेत्र में अरावली की इन पहाड़ियों को सूर्यकूट पर्वत का नाम दिया गया है। संस्कृत साहित्य के सुप्रसिद्ध विद्वान अरुणदेव वर्मन ने अपनी पुस्तक सूर्य शतक में यहां का वर्णन किया है और कालिका माई की वन्दना करते हुए लिखा है: ओम् श्री कालिके शुभदे देवि सूर्यकूटनिवासिनी । त्वम् देवि महामाये, विश्वरूपे नमोऽस्तुते।। 12 दरवाजों से युक्त माता का यह भवन अष्टकोण पर तान्त्रिक विधि से बना हुआ है। इसके बाहर की परिक्रम...